Books

किताबें पढ़ना और लिखना मेरा पैशन है, नये-नये किरदारों को गढ़ने और उनके आसपास उन कहानियों को बुनने में, जो आपको कभी गुदगुदा दें तो कभी झकझोर दें.. एक अलग ही रोमांच है। यह एक ऐसी विधा है जिसके लिये ढेर सा ज्ञान, इंसानी व्यवहार की समझ और कल्पनाशीलता की जरूरत होती है, जो मुझे लगता है कि मेरे पास है।

जिहादी परिंदे

क्या आपने आसपास कोई ऐसा किरदार देखा है जो एक तरह से सेक्स बीमार हो। जिसके लिये कोई भी, कैसी भी औरत एक लजीज दोप्याजे गोश्त की हांडी से ज्यादा और कुछ नहीं… औरत का हर अंग जिसमें एक उत्तेजना पैदा करता हो… कंसंट्रेट करते-करते जिसने अपनी कल्पनायें इतनी जीवंत कर ली हों कि वह दुनिया की किसी भी लड़की औरत के साथ एक आभासी संसर्ग में भी वैसा ही मजा पा लेता हो जैसा कोई इंसान हकीकत के संसर्ग में पायेगा।

इस कहानी का किरदार एक ऐसा ही शख्स दया शंकर है जो लखनऊ का रहने वाला एक आम इंसान है लेकिन जिसकी उन्मुक्त यौनेच्छायें उसे ऐसी साजिश के गहरे भंवर में फंसा देती हैं जहां से उसका निकलना लगभग असंभव हो जाता है। लखनऊ से ले कर अमेरिका और योरप तक उसे वह सारा रोमांच, वह सारा सुख मिलता है, जिसका वह भूखा था, जिसके लिये वह किसी भी हद तक जा सकता था, लेकिन यह सब उस परिणति की कीमत थी जिसकी देहरी पर अंततः उसे पहुंचना पड़ा।

एक छोटी सी नौकरी से उसके नये जीवन का जो सिलसिला शुरू होता है वह पैसे और प्रॉपर्टी के लिये बुनी गयी साजिश को पार करते हुए उसे एक जिहादी नेटवर्क के साथ जोड़ कर अंततः मौत के गहरे कुएं में धकेल कर ही ख़त्म होता है।
हम हर शख्स को नैतिकता के तराजू पर नहीं तौल सकते… कुछ लोगों के लिये इसकी कोई वर्जना नहीं होती, उन्हें वह सब ही आकर्षित करता है जो अनैतिक हो, अतिवाद हो, अपरिमार्जित हो… दया शंकर एक ऐसा ही शख्स था।

Daya Shankar was someone who could be called sexually sick — a hypersexual disordered paedophilic character, who found women as nothing more than a mere platter of served meat. For him every part of the woman was nothing but a means of sexual driving and arousing his hyper excitement. His imagination was such that he envisioned he could get the same pleasure with any girl or woman in the virtual transition just as any human would get in the realm of reality.
Daya Shankar was the kind of common Indian whose understanding and love for the western culture was full of wrong interpretations of free sex, lust and uncontrollable absurd sexual fantasies, and those very fantasies trapped him in a vortex from where it was impossible to get out of. Starting from a small job and getting trapped in a web of conspiracy for acquiring property and getting entrapped in the connections to a jihadi network, his pursuit of the real happiness that he was seeking came with a real price.
We cannot weigh every person on the scale of ethics … For some people, taboos are minor, and they end up attracting all those who are immoral and extremist. Daya Shankar was a man of that fallen scale.

जिहादी परिंदे
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